दिल के जज़्बात
Sunday, 12 April 2015
चार मिसरे
अपने ग़म को भूलाते रहे रात दिन
ग़म को खुद से छुपाते रहे रात दिन
दिल न हो जाये मायूस बस इसलिए
बे - सबब मुस्कराते रहे रात दिन
डा.कमला सिंह 'ज़ीनत'
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