Tuesday, 10 March 2015

दुआ
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तिल दुआ मेरी तूल तक पहुँची 
टूटे दिल से नजू़ल तक पहुँची 
जब तड़पती हुई दुआ रख दी
तब दुआ ये कबूल तक पहुँची
---डा.कमला सिंह 'ज़ीनत'

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर...

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 12-03-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1915 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  3. बहुत खूब,बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.

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