दिल के जज़्बात
Saturday, 28 March 2015
एक शेर
ग़ज़ल लिखती हूँ मैं जिसमें अगर हो फिक्र न'दारद
तो ऐसी वैसी ग़ज़लों को अमूमन फाड़ देती हूँ
डा.कमला सिंह 'ज़ीनत'
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