रिश्तों के टूटने के निशां मिटते नहीं जिंदगी में,
ऐसा भी रिश्ता क्या जो दंभ में ज़ज्बात को निगल जाये।
-----------------------------------------------कमला सिंह
समंदर नहीं,जो पानी की लहरों से रेत पे बने निशां को भी,
अपने संग बहा ले जाये ..... कमला सिंह
अभिमान इतना भी क्या की रिश्तों की डोर टूट जाये
ऐसा भी रिश्ता क्या जो दंभ में ज़ज्बात को निगल जाये।
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