दिल के जज़्बात
Monday, 5 January 2015
था बहुत देर तक ठहरा मुझमें
कोई गूँगा सा था बहरा मुझमें
जाते जाते सितम ये तोड़ गया
दे गया ज़ख़्म वो गहरा मुझमें
कमला सिंह 'ज़ीनत'
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