Wednesday, 30 August 2017

खु़दाया खै़र करे
______________
जब दिल के बंधन खुलते हैं
खुश्बू के रस रस घुलते हैं
तू याद बहुत ही आता है
अनजाने में तड़पाता है
तेरी यारा ऐसी लत लागी
मैं कब सोई और कब जागी
तू काहे मुझसे बैर करे
मेरे अंदर अंदर सैर करे
तेरा यार खु़दाया खै़र करे
तेरा यार खु़दाया खै़र करे।
__कमला सिंह "जी़नत"

No comments:

Post a Comment