
भोला सा दिखता है उनका मन।
कोई भेद नहीं कोई भाव नहीं
दिखता है सिर्फ अपनापन।
जिसकी देखि मीठी बोली
फिर तो क्या वो उनकी हो-ली।
ना हिन्दू ना सिख इसाई
आपस में सब भाई भाई ।
गलियों नुक्कड़ और चौराहे
ये सारे है उनके अड्डे।
उनका जज्बा उनकी बोली
शैतानों की मस्ती टोली।
चिंता मुक्त सब घूमना फिरना
भूल जाना फिर पढ़ना -पढाना।
ये है बचपन ये है बचपन ...
.....कमला सिंह ....
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