Wednesday, 30 April 2014

हाइकू(मज़दूरी) 
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बंधक मन
बिकता है यौवन 
मज़दूरी में 
--कमला सिंह 'ज़ीनत'



डूबती सांसे 
मरता बचपन 
मजदूरी में। 
कमला सिंह 'ज़ीनत'


बिकते जिस्म 
तङपती है रूह 
मजदूरी में।
कमला सिंह 'ज़ीनत'


तन पिंजर 
झूकती है कमर
मजदूरी में।
कमला सिंह 'ज़ीनत'


तेरे लफ़्ज़ों से बनी हूँ मैँ 
तेरी सांसों में पली हूँ मैं 
कहते हो शायरी जिसे 
तेरे प्यार में ढली हूँ मैं 
---कमला सिंह "ज़ीनत "
मैंने अक्सर तुम्हें देखा है गैरों के मुहब्बत में गुमसुम, 
मेरे हबीब अपनी यादों के साए से
मेरी रूह को रिहाई दे दे 
---कमला सिंह "ज़ीनत "
तेरे लफ़्ज़ों से बनी हूँ मैँ 
तेरी सांसों में पली हूँ मैं 
कहते हो शायरी जिसे 
तेरे प्यार में ढली हूँ मैँ 

 कमला सिंह 'ज़ीनत'
 हाइकू(मज़दूरी) 
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बंधक मन
बिकता है यौवन 
मज़दूरी में 
--कमला सिंह 'ज़ीनत'

Tuesday, 29 April 2014

एक ग़ज़ल मेरी सोच ,मेरा नज़रिया
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हर तरफ सिर्फ मारा मारी है
आग के लहजे में चिंगारी है

आज भी देते हैं मेहमाँ का पता
अब परिंदों में ही खुद्दारी है

कम ही किरदार से बड़े हैं लोग
हर बड़ा नाम तो अखबारी है 

रस्में उल्फत निभा रहे हैं लोग
दिल में एक सर्द जंग जारी है

फूल नश्तर में ढल गए हैं सभी
शाख़ पे काँटों की फुलवारी है

ये क़यामत नहीं तो क्या 'ज़ीनत'
जिस तरफ देखिये बमबारी है
----कमला सिंह 'ज़ीनत'
---------इश्क --(नज़्म)
लफ्ज़ ये इश्क मोअत्त्बर है बहुत 
कोई चाहे तो कर नहीं सकता 
कोई चाहे तो इश्क होता नहीं 
सबकी किस्मत में इसका रंग नहीं 
सबके दामन में नूर इसका नहीं 
सबके लकीरों में ये नहीं लिखा 
इश्क अल्हड़ है,बावला है ये 
जिसको होता है,सो नहीं सकता 
रोना चाहे तो,रो नहीं सकता 
इश्क रब से हो तो,मूसा कर दे
इश्क रब से हो तो,ईसा कर दे
ऐशकरनी करे,किसी को इश्क
कोई बन जाती है मीरा पल में
लाख मंदिर में कोई सेवा करे
लाख मस्जिद में दे अज़ान कोई
लाख मेवा चढ़ाये ईश्वर को
लाख सजदे में गिर पड़े कोई
इश्क करने से हो नहीं सकता
इश्क का बीज बो नहीं सकता
जब कोई इश्क में खो जाता है
इश्क ही इश्क वो हो जाता है
इश्क ही इश्क वो हो जाता है
-----कमला सिंह 'ज़ीनत'
मेरे पुस्तक की एक और ग़ज़ल 
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सहन अपना बाँट दीजिये 
तल्ख़ियों को पाट दीजिये 

दूसरों को भी मिले सबक़ 
इक नया प्लॉट दीजिये 

लिख के पूरी अपनी ज़िंदगी 
डॉट डॉट डॉट दीजिये 

दौर अब नहीं रहा जनाब
भाईयों को डाँट दीजिये

उठ गए जो आपकी तरफ
उँगलियों को काट दीजिये

ज़िंदगी है फ़िल्म ये ज़ीनत
इक हसीन शॉट दीजिये
-------कमला सिंह 'ज़ीनत'