Monday, 3 June 2013

लोग कहते है की खुद ही एक ग़ज़ल हूँ मैं 
किसी के आँखों का काजल तो ,
किसी के लिए अल्लाह की फज़ल हूँ मैं,
जाफरानी हूँ, किसी के लिए तो ,
किसी के सपनों का महल हूँ मैं 
माहताब हूँ किसी के दिल का 
तो किसी का बीता कल हूँ मैं।
क्या कहूँ खुद को खुद के बारे में,
अल्लाह की बनायी सिर्फ और सिर्फ ,
एक 'पहल' हूँ मैं।। 
--------------------कमला सिंह --------

log klehte hain ki .khud ik gazal hun main 
kisi ki aankhon ka kajal,tho kisi ke 
allah ka fazal hun main,
jafrin hu kisi ke liye tho,
kisi ke sapno ka mehal hun main,
mahtaab hu kisi ke dil ka 
tho kisi ka bitaa kal hu mai ,
kya kahu khud ko khud ke bare me 
allah ki banayi sirf aur sirf ,
ek 'pehal' hu mai ....
-----------------kamla singh ---------

Sunday, 2 June 2013


रंजीदा है मुझसे यार मेरा 
कैसे बताऊ उसे प्यार मेरा 
बेकरार दिल की ख्वाईश थी 
ईमानदारी से करता कभी
 वो भी इंतज़ार मेरा।।
 ------कमला सिंह -------

ranjida hai mujhse pyar mera 
kaise sunau usse dil-ai haal mera
bekrar dil ki khawayish thi ki 
imandari se kabhi karta vo intzaar mera...   कमला सिंह

Saturday, 1 June 2013


तमाम हसरतों को दरकिनार कर दिया मैंने 
एक तेरे सिवा, 
सब कुछ गवां दिया दिल की लगी में 
एक तेरे सिवा, 
चाहत तो  बस इतनी ही है जिंदगी में मेरे 
कुर्बान कर दूँ खुद को, 
एक तेरे सिवा।।
------------------------------------कमला सिंह --- 

tamam hasraton ko darkinaar kar diya maine 
ek tere siva 
sab kuch gava diya dil ki lagi me maine
ek  tere siva
chahat tho bas ab itni  hi hai zindgi me mere 
kurbaan ka du khud ko 
ek tere siva......
----------------------------kamla singh -----

Friday, 31 May 2013

क़त्ल करता है इंसान अपनी ज़मीर का 
चंद  सिक्कों के खातिर ही ,
कातिल भी बन जाता है अपने ईमान का 
पापी पेट के खातिर भी।
---------कमला सिंह 

कातिल

कातिल थी अदाए उसकी 
जवानी का जोर था ,
चलाया जो तीर उसने मुझपर 
ना हलचल न शोर था।
बन बैठी मैं भी कातिल अपना 
उसकी दिल्लगी का सुरूर था, 
कैद मिली खुद के माजी के हाथों  
ये मेरे दिल का कसूर था।।
---------कमला सिंह ---

Thursday, 30 May 2013

दिल को हरे बैठें है इस इंतजार में 
आएगा वो कभी दिल के बाज़ार में 

खरीदने आये शायद यादों का गुलदस्ता, 
चढ़ाने  की खातिर दिल के मजार में।।
----------कमला सिंह ------

Monday, 27 May 2013

तालों में बंद है सुकूं की चाभियाँ 
जिंदगी की कमाई भी है मेरी .
चाहिए  अगर ये तिजोरी तुझे भी,
मांग ले संतोष जिंदगी से भी।।
---------कमला सिंह -----