दिल के जज़्बात
Tuesday, 1 October 2013
परस्तिश की थी हर कदम पे तेरी ए ज़ीनत
ठोकरें मार कर तूने उसे हीरा बना दिया
-------------------------------कमला सिंह ज़ीनत
सवाली बन कर तेरे दर पे जो आई ज़ीनत
तू खुद ही सवाली बन बैठा मेरा खुदा
----------------------कमला सिंह ज़ीनत
मेरी महफ़िल सजती है तेरे नाम से ज़ीनत
वर्ना मेरा होना या न होना किस काम का
----------------------------------कमला सिंह ज़ीनत
जिंदगी मैंने तेरे नाम कर दिया खुद को
बचा क्या है अब मेरे पास ज़ीनत
----------------------------कमला सिंह ज़ीनत
तेरे होने से महफ़िल में करार आता है ज़ीनत
वरना महफ़िल में ए जाना में कौन ठहरेगा
----------------------kamla singh zinat
उल्फत में फकत खुदा बनाया
था जिसको
ज़ीनत
सज़दे में मुझको ही मांग लिया उसने
------------------------कमला सिंह ज़ीनत
वो आरज़ू था नसीब था मेरा ज़ीनत
साथ अपने वो ज़ीस्त मेरी ले गया
-------------कमला सिंह ज़ीनत
दुआओं में फकत मांग कर देख मुझे
बाखुदा शहंशाह हो जायेगा तू
----------------कमला सिंह ज़ीनत
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)