Thursday, 6 June 2013

baarish ki bunden

रिमझिम बरसती बूंदों ने जगा दिया वो बांकपन फिर से 

इठलाती हूँ मैं भी काले बादलों से घिरी घटाओं के जैसे।

मदमस्त है धरती की जवानी भी खुबसूरत फजाओं में

 
कहता है मन मेरा भी,डूब जाऊं इस रुत और हवाओं में। 

झूम लूँ मैं भी,भीगी खुशबु से लिपट कर कुछ पल के लिए ही,


जो मदहोशी में लिए जाती है मुझको अपनी शीतल,रंगीन पनाहों में 


.............................................................कमला सिंह ......

rimjhim barsti bundo ne jaga diya vo bankpan phir se 


madlati ithlaati hu mai kale badlon se ghiri ghatao ke jaise

madmast hai dharti ki javaani bhi fajaon me


kehata hai man mera bhi in rut aur hawaon me

jhum lu mai bhi in bhigi khusbu se liptkarkuch pal ke liye hi

,
jo madhoshi me liye jati hai mujhko apni shital rangeen


 panaaho me..
................................................................kamla singh ....

जुदाई

 पत्ते ज़र्द हो गए जुदा होकर, वृक्छ की शाख से, 
'भभकती लॊ'की रौशनी बुझ सी गयी हो जैसे राख से,
 हम सोचते ही रह गए जिंदगी की अनसुलझी पहेली, 
मैं तनहा क्यों हूँ आज भी इस महफ़िल ऐ साज़ से।
...........................................कमला सिंह 

patte zard ho gaye juda hokar vrich ki shaakh se 
bhabhakti lau ki roshni bujh gayi ho jaise rakh se 
hum sochte reh gaye zindgi ki unsuljhi paheli.
mai tanha kyu hun aaj bhi is mehfil-ai saaz se ....
................................................kamla singh जुदाई 

Wednesday, 5 June 2013


आँखों के रास्ते उतर गए होते दिल में तेरे

गर शीशा ऐ पैमाना ना छलक आया होता

-----------------------------कमला सिंह ---


aankho ke raste uatar gaye hote dil me tere

 
gar seesha ai paimana na chalak aaya hota ....ks
मेरी नज़रें हर बार कुछ कहती हैं तुमसे
 
हर बार चल देते हो अनदेखा कर मुझको।


--------------------कमला सिंह ---

meri nazaren har baar kuch kehti hai tumse 


har baar chal dete ho andekha kar mujhko ..


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दिल की हसरतों को बता के सताया न करो
खो देने का गम सबको देके यूँ जाया न करो
अभी तो शुरू हुआ है इजहारे मोहब्बत का सिलसिला
कुछ कदम पे जाते ही तुम इस कदर घबराया न करो
जिंदगी बड़ी ही अनमोल है, मुश्किल से मिलती है
रुसवाइयों के डर से मोहब्बत को उर्फ्सुदा बनाया न करो
दूर तलक जाना है मंजिल-ए मोहब्बत में तुमको
तनहा छोड़कर मुझको, मंजिल से कतराया न करो
-----------------कमला सिंह ------------

Tuesday, 4 June 2013

khubsurat manzar

खुबसूरत से नज़ारे हैं, 
कुछ बहके से सितारे हैं।

फूलों से लदे ये मंज़र 
लिपटते हैं मुझसे क्यूँकर। 

मद्धम सी हवाएं टकराती हैं मुझसे 
कहती हैं कानों में कुछ चुपके से। 

शायद सारा रुत ही बेक़रार है 
किसी के आहट का इंतज़ार है।

सुकूँ है दिल को जिससे मेरे 
तलाश बरसों की थी मुझको जैसे।

 प्यासे को सावन का जैसे
मिलने को आतुर हूँ  वैसे।


--------------कमला सिंह -----  

Monday, 3 June 2013


दिल मिलना जरुरी है ,रिश्तों को मिलने की खातिर 
जिस्म का मिलना कोई बात नही,रूह की मुलाकात जरुरी है।
------------कमला सिंह -----------

dil milna jaruri hai rishto ko milne ke khatir 
jism ka milna koi baat nahi,rooh ki mulakaat jaruri hai....
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