Wednesday, 2 October 2013

गहराई है मेरे आँखों के समुन्दर में ज़ीनत 
एहतियात रख के कदम रखना उनमें 
--------------------------कमला सिंह ज़ीनत 
शुरू होता है जो सिलसिला तुमसे मेरी जिंदगी का ज़ीनत 
ख़त्म ये सफ़र तुम पर हो खुदा खैर करे
----------------------------कमला सिंह ज़ीनत  
शुरू होता है जो सिलसिला तुमसे मेरी जिंदगी का ज़ीनत 
ख़त्म ये सफ़र तुम पर हो खुदा खैर करे
----------------------------कमला सिंह ज़ीनत  
तलबगार हूँ बस तेरी इक नज़र के लिए ज़ीनत 
मैंने सौंप दिया जिंदगी भी अब तो अपनी  
---------------------------------कमला सिंह ज़ीनत  

Tuesday, 1 October 2013

जिंदगी तुमसे से शुरू और खत्म भी तुमसे है
ये बात बताना मुझे मंज़ूर नहीं ज़ीनत 
हर वक़्त वो दीवानों सी  बात करता है ज़ीनत 
जाने के वो कैसी सजा काट रहा है   
-------------------------कमला सिंह ज़ीनत 

उसकी एक मुस्कराहट पर कुर्बान सौ जिंदगी ज़ीनत  
बस उसके एक हाँ का सवाल है केवल  
-----------------------------कमला सिंह ज़ीनत 
इज़हार भी करते हैं वो,इकरार भी"ज़ीनत"
महफ़िल में जाने क्यों वे परेशां से हो गए  
---------------------कमला सिंह ज़ीनत