Wednesday, 10 July 2013

हर लम्हा जिंदगी का हसींन होता है,जब तू करीब होता है 
उजडती है तब दुनिया मेरी,तकदीर मेरा जब बदनसीब होता है 
-------------------------------------------------कमला सिंह 'जीनत' 

Monday, 8 July 2013

उलझनों से भरी बंदगी क्यों, 
रात और दिन एक ही लगी क्यों, 
बेमानी सी लगती है हर एक शय ,
खामोशियों से भरी ये जिंदगी क्यों।
-----------------------कमला सिंह 'जीनत'

Uljhano se bhari bandagi kyun
Raat din aik hi lagi kyun
Be maani sa lagta hai har aik shaye
Khamoshiyon se bhari ye zindagi kyun.
------------------------कमला सिंह 'जीनत'

Sunday, 7 July 2013

jarurat

बुलबुल को फूल,शमां को परवाना चाहिए 
मय में डूबने वालों को मयखाना चाहिए 
कुछ बातें होती हैं अलहदा इस नायाब संसार में 
भूखे को रोटी और धनवालों को तहखाना चाहिए 
---------------------------------कमला सिंह 'जीनत'

bulbul ko phul ,shama ko parwana chahiye
may me dubnewalon ko maykhana chahiye 
kuch baten hai alahdaa is nayab sansaar me 
bhukhe ko roti aur dhanwalon ko tehkhana chahiye 
-----------------------------------------kamla singh 'zeenat'

Thursday, 4 July 2013

tasawwur

तसव्वुर में अक्सर वो झाँका करते है मेरे, 
जेहन में बसा करते हैं हर लम्हें में मेरे,
चाहती हूँ, दूर हो जाऊ कुछ पल उनकी यादों से,
जुदा हो नही पाती मैं ख्यालों में लिपटी ज़ज्बातों से।। 
----------------------------------कमला सिंह 'जीनत'   

tasawwur me aksar vo jhanka karte hain mere 
jehan me basa karte hai ,har lamhe me mere 
chahti hun dur ho jaun kuch pal unki yadon se 
juda ho nahi pati khyaalon me lipti zazzbaton se 
---------------------------------------kamla singh 'Jeenat'

जानेमन

कभी अपना  सा लगता है 
कभी बेगाना सा लगता है  
जाने क्या खास है उसमे 'जीनत'
बड़ा दीवाना सा लगता है  ।

कभी सीने से लगा लेता है 
कभी बाँहों से झटक देता है 
शरारत या उसकी अदायगी समझूँ  
फिर भी बड़ा ही प्यारा लगता है।

बातों में बड़ी कशिश है उसकी, 
दिल की जागीर का मालिक भी है 
पर जब होता है खफा मुझसे 
बड़ा अटपटा सा लगता है  

आता है जब प्यार मुझ पर 
दिल खोल कर बरस जाता है 
मीठी-मीठी बातों से अपने 
मुझको लुभा लेता है ।

कभी बेगाना सा लगता है  
कभी अपना सा लगता है 
जाने क्या खास है उसमे 
बड़ा दीवाना सा लगता है ।
-------------------कमला सिंह 'जीनत '

Wednesday, 3 July 2013

rishte

रिश्तों को भी कपड़े की तरह बदलने लगे है लोग।
छन में तोला छन में मासा बनने लगे है लोग 
बड़ी ही अजीब मिजाज़ है दुनिया का, 
रिश्तों की गहरायी को भी छलने लगे हैं लोग।
-------------------------------------कमला सिंह 

दूसरा जहां

मौत के आगे भी शायद कोई दुसरा जहाँ होगा 
वहाँ भी खुबसूरत धरती और खुला आसमां होगा।

प्यार,अपनापन और खिलती कलियों का चमन होगा
हम होंगे उस दुनिया में आज़ाद और खुशनुमा पवन होगा।

हम होंगे सभी 'एक' और कामयाबी का न चलन होगा 
आशियाँ नया बनायेंगे हम,अपना एक अलग जहाँ होगा 

मौत के आगे भी शायद कोई दूसरा जहाँ होगा 
वहा भी खुबसूरत धरती और खुला आसमां होगा।

------------------------------------------कमला सिंह